'शरण मेला’

कूडल संगम क्षेत्र में बसब क्रांति के दिन

’शरण मेला’

जनवरी 12, 13,14 और 15, 2016 को.

शरण बन्धुओं,

महामानवतावादी, मंत्रपुरुष, विश्व विभुति बसवेश्वर के तत्यों में श्रद्धा- विस्वास, आसक्त, बसव भक्त, बसव तत्वाभिमानी, बसवधर्मीय र्लिंगगयत सब लोगों को बर्ष में एक बार एक स्थान पर समावेश होना अत्यंत आवश्यक है । यह आपस में समानत्व, भाई-चारा बढाने के विकास के उद्देश्य से विश्वगुरु बसवेश्वर के विद्या भूमि, तपोस्थल, लिंगैक्य क्षेत्र कूडलसंगम में ई. १९८८(1988) - जनवरी 12,13,14 और 15 के दिन प्रथम चारित्रिक शरणमेला संपन्न हुआ । प्रप्रथ्म ऐतिहासिक बृहत मेले ने साडे तीन लाखों से भी अधिक जन समूह को आकर्षित किया । इस तरह भी बसव सागर को लहरों से प्रतियोगिता करने की तरह जन सागर समूहनै समावेश होकर बसवोद्यान में निर्मित बसव मंडप में समुदाय प्रार्थना की ।

इस तरह ’शरण मेला’ हर साल बसव क्रांति (मकर संक्रमण) के दिन जनवरी 12, 13, 14 और 15 को चलाने का आयोजन किया जायेगा । कुछ प्रमुख मठाधीश, प्रवचनकार, श्रेष्ठ साहित्यकार भाग लेकर व्याख्यान देंगे । जैसे मुसलमान धर्मानुयायियों को मक्का धर्मक्षेत्र है, सिखों के लिए अमृतिसर पवित्र है वैसे ही बसव धर्मानुयायियों को विश्वगुरू बसवेश्वर का लिंगैक्य स्थान कूडलसंगम ही धर्मक्षेत्र है । ऐसे पवित्र स्थान में भाई- चारे की भावना से लाखों की संख़या में आना चाहिए ।

शरणों का आना ही हमें प्राणों के समान

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