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लिंगायतवाद और हिंदू धर्म की तुलना

'लिंगायत' एक स्वतंत्र धर्म

लिंगायत धर्म गुरू बसवॆष्वर द्वारा 12 वीं सदी में प्रारम्भ किया एक धर्म है। गुण लक्षण, दर्शन और कर्मकांड कारणों से लिंगायत भी एक स्वतंत्र धर्म है, जिसके लिए बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म को मान्यता प्राप्त है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि लिंगायत हिंदू होने का दावा नहीं करते हैं। बहुजन नेताओं की राय है कि लिंगायत "हिंदू" नहीं हैं। "हिंदू धर्म चातुर्वर्ण और चतुराश्रमों का धर्म है ... यह स्पष्ट है कि लिंगायतवाद जैन धर्म और सिख धर्म की तरह एक स्वतंत्र धर्म है"। जोर दिया मानवता आकार लिया।

तो आइए लिंगायत और हिंदू धर्म के बीच के अंतर को देखें।

हिन्दू धर्म लिंगायत धर्म
1. एक संस्थापक गुरु नहीं है। 1. बारहवीं सदी के गुरु बसवेश्वरजी लिंगायत धर्म के संस्थापक हैं।
2. हिन्दु धर्म में नास्तिक, निरिश्वरवादी. सेश्वरवादी है। 2. यह सेश्वर वादी धर्म है और इसमें सृष्टिकर्ता पर विश्वास रखना अत्यावश्यक है।
3. वेद, आगम को प्रमाण माना जाता है। 3. वेद, आगम और पुराणों को प्रमाण नहीं माना जाता। वचन साहित्य को आधार माना जाता है।
4. चतुर्वर्णो पर विश्वास करता है, 4. जाति और वर्ण के आधार पर विभजन को नहीं मानता।
5. द्विजवर्णियों को ही उपनयन का अधिकार है। 5. सभी मानवों को इष्टलिंग दीक्षा का अधिकार है।
6. स्त्रियों को उपनयन नहीं है। 6. पुरूषों की तरह स्त्रियों को भी लिंगदीक्षा है ।
7. कई देवताओं पर श्रद्धा रखी जाती है और बहुदेवतोपासना की जाती है। 7. सृष्टिकर्ता लिंगदेव पर ही श्रद्धा रखी जाती है और एकदेवोपासना की जाती है।
8. तीर्थक्षेत्र यात्रा पर श्रद्धा होती है। 8. तीर्थक्षेत्र यात्रा पर श्रद्धा नहीं होती।
9. ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और मुहूर्तो पर विश्वास रखा जाता है। 9. ज्योतिष, वास्तु शास्त्र इन सब में विश्वास नहीं रखा जाता।
10. हिन्दु धर्म के श्रद्धा केन्द्र मंदिर हैं। 10. लिंगायत धर्म के श्रद्धा केन्द्र अनुभव (वसव) मंटप है।
11. शाकाहारी और मांसाहारी दोनों होते हैं। 11. शाकाहार अत्यावश्यक माना गया है।
12. होम-हवन, यज्ञ-याग, प्राणी बलि आदि सभी हैं । 12. होम-हवन, यज्ञ-याग, प्राणी बलि इन सब का निषेध किया गया है।
13. विवाह में अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लगाये जाते हैं और पुरोहित जी का होना जरूरी है। 13. अग्नि साक्षी और सात फेरे नहीं होते। केवल गुरु-लिंग-जंगम को साक्षी माना जाता है।
14. द्विजों के शवों का अग्नि दाह संस्कार किया जाता है। 14. लिंगायतों के शवों को जमीन में गाड़ा जाता है। इष्टलिंग को हाथ में रखकर बैठने की स्थिति में दफनाया जाएगा।
15. भक्त को मंदिरों में भगवान की पूजा करने की अनुमति नहीं है। पुजारी करेंगे पूजा 15. भक्त द्वारा देव की सीधी पूजा की जाती है । मध्यस्थ की कोई ज़रूरत नहीं है |
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