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लिंगायत धर्म में हर रोज शुभ है

आज कल कहकर मत टालो
आज का ही पावन दिन है- ’शिवशरण’ कहनेवाले को,
आज का ही पावन दिन है- ’हर शरण’ कहनेवाले को,
आज का ही पावन दिन है- अपने कूडलसंगमदेव को
निरंतर स्मरण करनेवाले को। /8 [1]

हमारे शरण पूछे तो शुभ मूहुर्त कहिए
राशिकूट ऋणसंबंध है - ऐसा कहिए
चंद्रबल ताराबल भी है कहिए
कल से आज का दिन हि श्रेष्ठ कहिए जी
कूडलसंगमदेव की पूजा का फल आपका है। /101 [1]

उदय, मध्यान्ह और संध्याकाल को देखकर
करनेवाले कर्मीयो, तुम सुनो,
शरण के लिए उदयकाल कहाँ?
अस्तमान काल कहाँ?
महामेरु के आड़ में रहकर
अपनी छाया को ढूँढनेवाले भाव भ्रमितों को
पसंद न करता हमारा कूडलचेन्नसंगमदेव। /712 [1]

सोमवार मंगलवार शिवरात्रि मनानेवाले भक्तों को
लिंगभक्त के लिए समान कैसे कहूँ?
दिन श्रेष्ठ हैं या लिंग श्रेष्ठ है?
दिन श्रेष्ठ समझकर करनेवाले
पंच महापातकियों का मुख देखा न जाता।
इसलिए, कूडलचेन्नसंगय्या
ऐसे लोगों का मुख देखा ना जाता। /928 [1]

तिथि-वार मैं नहीं जानता, लग्न-विलग्न मैं नहीं जानता,
इसे जानकर सात वार, अठारह कुल हैं, कहते हैं
हम इसे नहीं जानते हैं,
रात, एक वार, दिन एक वार,
भवि एक कुल है, भक्त एक कुल है,
हम इतना ही जानते हें,
बसवप्रिय कूडलचेन्नसंगमदेव। /2047 [1]

[1] Number indicates at the end of each Vachana is from the book "Vachana", ISBN:978-93-81457-03-0, Edited in Kannada by Dr. M. M. Kalaburgi, Hindi translation: Dr. T.G. Prabhashankar 'Premi'. Pub: Basava Samiti Bangalore-2012.

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