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4. बसवा एक बहादुर लड़का

बसवा एक बहादुर लड़का

बसवा एक बहादुर लड़का

बसवरस केवल प्रतिभाशाली ही नहीं बल्कि साहसी भी था। प्रश्नों के उत्तर देने में प्रथम और गुरुओं से प्रश्न पूछने में आगे रहता था ।। सम वयस्क दोस्तों के साथ स्नेह मय था ।। उनका स्वभाव झगड़ालू का न था ।। कोई आपस में गालियाँ देते रहें, झगड़ता रहे तो बीच में जाकर रोकता था

बागेवाडी के नंदी मंदिर के विशाल प्रांगण के एक भाग में प्रतिदिन पाठशाला चलती। मंदिर के बगल में बाहर एक विशाल जलाशय था ।। लड़के स्लेट धोने कुएँ में उतरते समय एक लड़का जलाशय का फिसलन भरा पत्थर पर पैर रखने से पानी में गिर पड़ा। बाकी लड़के सीढ़ियों पर जाकर चिल्लाने लगे। बसवरस पानी में कूद कर डूबते हुए मित्र को बाहर ले आया। उसे उठाकर सीढ़ियों पर ले आने के पहले ही कुछ बुजुर्ग वहाँ पहुँच गये। बसवरस लड़के को किनारे पर लाकर अनुभवी के समान उसकी पीठ पर बैठकर पेट के पानी को बाहर निकालकर हवा देने लगा

इतने में दूसरे सम वयस्क लड़के ने आकर शिकायत की कि बसवरस ने ही लड़के को पानी में ढकेला, हमारे चिल्लाने से बाहर खींच ले आया। वह लड़के आलसी, झगड़ालू होने के कारण शिक्षक उन्हें गालियाँ देते और बसवरस का सराहना करते थे ।। इसलिए जलन के कारण बदला लेना चाहता था। कुएँ में गिरे बालक के माता- पिता भी आकर शोर मचाने लगे

भगवान की कसम मैंने ऐसा नहीं किया." ये शब्द निकलने से पहले ही लड़के को होश आ गया। वहाँ एकत्र लोगों ने पूछा कि किसने कुएँ में ढकेला ।। क्या बसवरसने ?? उस बालक ने कहा कि नहीं, मैं जलाशय का फिसलन भरा पत्थर पर पैर रखने से खुद गिर पड़ा। उसके माता- पिता ने अपने गिरे हुए पुत्र को बचाने से बसव के प्रति आभार प्रकट करके, बसवरस की खूब प्रशंसा की। उसके असामान्य धैर्य, साहस की प्रशंसा की।

सन्दर्भ: विश्वगुरु बसवन्ना: भगवान बसवेष्वर के जीवन कथा. लेखिका: डा. पुज्या महा जगद्गुरु माता महादेवी। हिंदी अनुवाद: सी. सदाशिवैया, प्रकाशक: विश्वकल्याण मिशन बेंगलुरु,कर्नाटक. 1980.

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