बसवण्णा ( बसवेश्वर) कौन है ?

"जनमानस में अपूर्व जागृति लाकर, कोई भी जन्म से उच्च या नीच न होकर जन्म से सभी समान होकर नैतिक ज्योति की प्राप्ति से श्रेष्ठ बनता है।" ऐसे तत्व का प्रचलन करके क्रांति पुरुष बसवेश्वरने समस्त मानव जाति को धर्म संस्कार प्राप्त कराने और मानव स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर मानवधर्म और विश्वधर्म को प्रदान किया । यह उत्प्रेक्षा नहीं है कि इनकी लडाई मानव के समाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक, मूलभूत अधिकारों के लिए हुई; लेकिन उनका ध्यान रहा कि जाति, स्तर, पेशा आदि किसी भी भेद के कारण मात्र कोई भी अपने मूलभूत अधिकारों से वंचित न हो । ऐसे मूलभूत अधिकारों में धर्म- संस्कार भी एक है । इन सब को दिलाना ही उनका अंतिम लक्ष्य रहा ।

"कल्याण"(Welfare) को अंतिम ध्येय मानकर बसवणा धर्म को साधन बनाकर क्रांति करने लगे । जब लोग धर्म की तरफ न आये तब जनमानस तक धर्म पहुंचाने के कार्यक्रमों का आयोजन किया । मातृ भाषा में धर्म साहित्य रचकर जनता की बोलियों में शैक्षणिक ज्ञान देकर उन्हों" की बोलियों में आत्मगीत गाने की सुगमता प्रदान की। बसव के भगीरथ प्रयत्नों से मातृभाषा में आध्यात्म वचन साहित्य सरिता- प्रवाह के रूप में बहने लगते ही शोषण से तप्त असंख्य लोग पुनश्येतित होकर पनीत हुए। वे ऊपर उठकर मुक्ति के गौरीशंकर चढकर आत्मविश्वास के प्रकाश पुंज के समान चमकने लगे ।

नूतन परंपरा के सृष्टिकर्ता होकर "मनुजदेव" ही बनकर, दुखियों के रत्न्दीप बनकर, तप्तों के भाग्यदेवता होकर बसवेश्वर आत्मविश्वास की फव्वारों को जनमानस में प्रस्फुटित करनेवाले भुवन के भाग्यदाता है बसवेश्वर । ऐसे विभुति पुरुष का उदय की बारहवीं शती में सम्पन्न हुआ ।

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Guru Basava Vachana

Akkamahadevi Vachana

[1] From the book "Vachana", pub: Basava Samiti Bangalore 2012.