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अजगण्ण पिता (तंदे) (११६०)

पूर्ण नाम: अजगण्ण पिता (तंदे)(११६०)
वचनांकित : महाघन सोमेश्वर

सूर्य को धेखो अंधकार के समान हुआ मेरे गुरु का उपदेश
वायु के हाथ की ज्योती के समान हुआ मेरे गुरु का उपदेश
आग के मुख के भीतर के कर्पूर के समान हुआ मेरे गुरु का उपदेश
महाघन सौराष्ट्र सोमेश्वर के
सद्‌गुरु के मेरे करस्थल पर कृपा करने के कारण
सारी सांसारिकता भाग निकली। / १४१९ (1419)[1]

अजगण्ण तंदे(११६०) अजगण्णा शरणी मुक्तायक्का के भाई हैं। ये लक्कुंडि के रहनेवाले थे। वहां का सोमनाथ इनका अधिदैव है। अजगण्णा गुप्तभक्त थे जो इष्टलिंग को मुंह में धारण करते थे। इनकी मन:स्थिति भाव-लिंगपूजा है। कई वचनकारों ने ऐक्यस्थल के प्रतिनिधि कहकर इनकी प्रशंसा की है। मुक्तायक्का के वचनों मे इनका महान्‌ व्यक्तित्व अभिव्यक्त है। ’महाघन सोमेश्वर’ वचनांकित से लिखे इनके १० वचन मिले हैं। वचनों में गुरु के लक्षण, गुरु शिष्य संबंध का स्वरूप, शरण का अनुपम व्यक्तित्व व्यक्त हुए हैं। ’प्रभुदेव के दस वचन के लिए अजगण्णा के पांच वचन सम है’ चेन्नबसवण्णा के इस कथन में अजगण्णा के वचनों की श्रेष्ठता का परिचय मिलता है।

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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