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अमुगे रायम्मा (११६०)

पूर्ण नाम: अमुगे रायम्मा, वरदानियम्मा
वचनांकित : अमुगेश्वर लिंग

उत्तम घोड़े को चाबूक मारेंगे क्या?
नगर का मालिक बनने के बाद, जाति गोत्र देखते हैं क्या?
परम सुज्ञानी के लिए प्राण का मोह है क्या?
लिंग संगी होकर शरण की कोई निंदा करें तो संदेह क्यों करे?
इहलेकवाले निंदा करे तो विरुद्ध क्यों हो?
अमुगेश्वर लिंग को जाननेवाले शरण को
कोई प्रशंसा करे तो क्या, कोई निंदा करे तो क्या? /1266 [1]

अमुगे रायम्मा (११६०) अमुगे रायम्मा अमुगि देवय्या की पत्नी हैं। पता चलता है कि ’वरदानियम्मा’ नाम से भी जानी जाती थीं। ये मूलत: सोलापुर की थीं। पति के साथ कल्याण आकर उसके बाद पुळुजे जाकर वहीं पर लिंगैक्य हूई। इनके ’अमुगेश्वर लिंग’ वचनांकित में रचित ११५ वचन उपलब्ध हुए हैं। ये वचन आचार प्रधान है। समाज की आलोचना भी इनमें की गयी है।

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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