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आनंदय्या (१६५०)

पूर्ण नाम: आनंदय्या
वचनांकित : सद्ययोजात लिंग

स्थावर लिंग पकढकर मारि देवता का संग करेंगे,
तो पीड़ा में पड़कर जन्म जन्म में आते रहोंगे।
स्थावर लिंग पकड़कर ईश्वर को पा गया समझना अल्प इच्छा है।
इन दोषीयों को देख
आनंद सिंधु रामेश्वर घृणा करेगा। / १५१८ (1518) [1]

आनंदय्या (१६५०) आनंदय्या के ’आनंद सिंधु रामेश्वर’ अंकित से रचे दो वचन मिले हैं इनमें वैराग्य पर विचार व्यक्त हुए हैं।

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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