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आयदक्कि लक्कम्म (११६०)

पूर्ण नाम: आयदक्कि लक्कम्म
वचनांकित : मारेश्वर प्रिय अमरेश्वरलिंग
कायक (व्यवसाय): पडें चावल बीनने का कायक

काया की कंगाली हो सकती है मन की कंगाली कैसी?
मजबूत-पहाड़ फोड़ेगी कैसी अगर छेनी की नोक में कंगाली हो तो?
महान शिवभक्तों को कंगाली नहीं; सत्यवान को दुष्कार्य मालूम नहीं
मारय्यप्रिय अमरेश्वर लिंग मेरे होने पर
किसी दाक्षिण्य की मुजे दरकार नहीं मारय्या। १२९१ (1291)[1]

लोभ तो राजा में हो सकता है
शिवभक्तों में कैसा लोभ?
रोष तो यमदूतों में हो सकता है
अजन्माओं में रोष कैसा?
इतने चावल का मोह तुम्हें क्यों? ईश्वर न मानेगा
मारय्यप्रिय अमरेश्वर लिंग को यह पसंद नहीं, मारय्या। /१२९३ (1293) [1]

आयदक्कि लक्कम्म (११६०) लक्कम्मा मारय्या की पत्नि हैं। मूलत: ये पति-पत्नि रायचूर जिला लिंगसूर तालूक अमरेश्वर गांव के थे। बसवण्णा का यशोगान सुनकर उनको देखने की इच्छा से कल्याण आये और वे चावल बिनने का कायक करते थे। अमरेश्वर इनका इष्टदैव है। लक्कम्मा के ’मारेश्वर प्रिय अमरेश्वरलिंग’ अंकित से

कायक की कमाई समझ भक्त दान की कमाई से
दासोह कर सकते हैं कभी?
इकमन से लाकर इकमन से ही
मन बदलने से पहले ही
मारय्यप्रिय अमरेश्वर लिंग को
समर्पित करना चाहिए मारय्या। /१२९६ (1296)[1]

जो मन से शुद्ध नहीं, उसमें धन की गरीबी हो सकती है,
चित्त शुद्धि से कायक करनेवाले
सद्‌भक्तों को तो जहाँ देखो वहाँ लक्ष्मी अपने आप मिलेगी
मारय्यप्रिय अमरेश्वर लिंग की सेवा में लगे रहने तक। /१२९७ (1297) [1]

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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