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बाहूर बोम्मण्णा (1160)

पूर्ण नाम: बाहूर बोम्मण्णा
वचनांकित : संगन बसवण्णा साक्षियागि ब्रह्मेश्वरलिंग
कायक (काम) बागवानी (Gardening)

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गरम लोहे पर पानी डालने से
पानी जो पीता है लोह का ताप है या लोह
उसे समझने पर वह अंगलिंग-संबंधी है।
दूध के उफनाने पर छिड़कोगे पानी तो
जो उसे स्वाहा करता है, वह दूध है या दूध का पात्र
उसे समझने पर वह क्रियाज्ञान आत्मा लिंग संबंधी है।
उभय का अर्थ समझने पर
क्रिया को व्यवहार, ज्ञान को ऐक्य
यह गुण है संगनबसवण्णा का खेल.
ब्रह्मेश्वरलिंग के अन्तरार्थ को समझानेवाले का खेल। / 1852 [1]

ये बाहूर के रहनेवाले थे जो बिजापुर जिला मुद्देबिहाळ तालूक में है। बागवानी इनका कायक था। इनका वचनांकित है ‘संगन बसवण्णा साक्षियागि ब्रह्मेश्वरलिंग' (संगन बसवण्णा साक्षी होकर ब्रह्मेश्वरलिंग)। अब इनके 41 वचन उपलब्ध हैं, जिनमें षट्स्थल तत्व निरूपित है। सभी वचनों में कहीं न कहीं बसवण्णा का नाम जो दिखाई पड़ता है वह एक विशेष बात है।

कृषिकार्य से ही आगे का फल प्राप्त होता है,
शस्त्रकला से ही वैरी को जीतने के समान,
सक्रियामार्ग के मर्म-धर्म को जानकर,
आसुरी कर्मों के तमबंधों को पारकर,
विजय प्राप्त कर सकेंगे!
यह है इष्टलिंगपूजक का विश्वास, संगनबसवण्णा का संबंध और
ब्रह्मेश्वर को जानने का अटूट विश्वास! / 1854 [1]

मुँह बंदकर, क्या नासिका से खा सकते हैं?
नासिका बंदकर, क्या मुँह से सँघ सकते हैं?
आँख बंदकर, क्या कान से देख सकते हैं?
कान बंदकर, क्या आँख से सुन सकते हैं?
इस प्रकार, इनकी आत्मा एक होने पर भी,
अपने-अपने स्वस्थान के अलावा, दूसरा कैसे देखे?
जो भी स्थल अपनाये, उस पर विश्वास रहना चाहिए।
यही है संगनबसवण्णा की भक्ति!
ब्रह्मेश्वरलिंग को समझने के लिए यही आधार है! / 1859 [1]

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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