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घनलिंगिदेव (16वीं शती)

पूर्ण नाम: घनलिंगिदेव
वचनांकित : घनलिंगि के मोह के मल्लिकार्जुन
कायक (काम): मठाधीश

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आग से आग मिलकर प्रकाश फैले बिना
आग के घास से मिलने से धुंआ उठता है।
प्रकाश तो दिखता है क्या भैय्या ?
इस परमार्थ के ज्ञाता परमज्ञानी के साथ
सम्यक् ज्ञानी के अनुभव स्फुरित होंगे तो
दोनों के देह, इन्द्रिय, मन
स्फटिक की मूर्ति जैसे
निर्मल स्वरूप को अपनाये बिना,
दोष तो रहेंगे क्या भैया?
ज्ञानी अज्ञानी के साथ संवाद करेंगे तो
दूध में खट्टा मिल जाने जैसा होगा, भैय्या
घनलिंगिय मोहद चेन्नमल्लिकार्जुन। / 2379 [1]

घनलिंगिदेव तोंटद सिद्धलिंगेश्वर के शिष्य थे। सुत्तूर के मठाधीश थे। ये कग्गेरे में ऐक्य हुए। 'घनलिंगि के मोह के मल्लिकार्जुन' वचनांकित में रचे 66 वचन मिले हैं। इनमें प्रधान रूप में सती-पति भाव निरूपित है।

सोने पर कसनेवाली कसौटी के रंग के मिश्रण को
सुनार के बिना
पसीना बहाकर पेट भरने वाला किसान जानेगा क्या?
परवस्तु से मिलन के अनुसंधान के पवित्र
मंत्रोच्चारण के लिंग प्रकाश को
लिंग संधानी जाने बिना।
स्मृति विभ्रम को आंतर्य में लिये हुए
वेषधारी कैसे जान सकते हैं?
घनलिंगिय मोहद चेन्नमल्लिकार्जुन ? / 2380 [1]

कोयल का मधुर स्वर सुनकर
कौआ उसके सामने बैठे।
कर्कशता से व्यंग्य से छेड़ने से
उस कोयल में कोई कमी दिखेगी क्या ?
सूर्य प्रकाश युक्त को
काले शरीरवाले कहकर दिन में न दिखेगी वाला
उल्लू बुरा भला कहे तो
सूर्य में न्यूनता दिखेगी क्या?
आईने का नाक नहीं कहकर नकटी निंदा करने से
उस आईने में कोई न्यूनता दिखेगी क्या?
द्वैत-अद्वैत की उपेक्षा कर,
अंग लिंग का पथ पहचानते हुए
स्वयं लिंगी बने शरण से।
विकलांग लंगड़े मानव
निंदा करते व्यंग्य करेंगे तो
उन लिंगानुभवियों में न्यूनता दिखेगी क्या
हे घनलिंगिय मोहद चेन्नमल्लिकार्जुन ? / 2381 [1]

हे देव,
मजदूरी करने जाकर सोने का घड़ा देखने जैसे
मर्त्यलोक में आकर मानव जन्म को देखा मैंने
उस मानव जन्म में
‘घुणाक्षर न्याय' की तरह। लिंग का आना देखा संयोग से
मुझे लिंग का मिलना विनोद भी लगा, विपरीत भी लगा,
कृपा करो कि कथनी जैसी करनी हो और करनी जैसी कथनी हो,
कथनी, करनी में भेद हो तो शरण नहीं मानेंगे।
यदि आपके शरण न मानेंगे तो तुम भी न मानोगे।
तुम न मानोगे तो भव की राक्षसी से पाला पड़ेगा।
उससे मैं डरूँगा, भय महसूस करूँगा,
कृपा करो कि मेरी कथनी और करनी में भेद न हो।
घनलिंगीय मोहद चेन्नमल्लिकार्जुन। / 2382 [1]

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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