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गुहेश्वरय्या (लगभग 1600)

पूर्ण नाम: गुहेश्वरय्या
वचनांकित : गुहेश्वर प्रिय निराळ लिंग

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सुज्ञान का आचरण, सुज्ञान का वचन
ज्ञान के मूल के ज्ञाता शरणों के चरणों में रखकर
मेरी रक्षा करो हे गोहेश्वरप्रिय निराळलिंग। / 2272 [1]

गुहेश्वरय्या के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं है। हस्तप्रतियों में 'गुहेश्वर के वचन' उल्लेख होने से अंदाज़ लगा सकते हैं कि ये वचन गुहेश्वरय्या के वचन है। 'गुहेश्वर प्रिय निराळ लिंग' वचनांकित के 43 वचन मिले हैं। इन वचनों का मुख्य उद्देश्य षट्स्थल तत्व निरूपण और व्रताचार हीन की आलोचना करना है। उनका संकलन मकर तर्क प्रस्ताव के वचन, जोगी तर्क के प्रस्ताव का वचन और कवि तर्क प्रस्ताव के वचन के अधीन किया गया है।

गगन में उड़ते पक्षी के पथ को
पीछे उड़ते पक्षी के अलावा नीचे खेलता मुर्गा जानता है क्या?
उस लिंग का संग-सुख प्राणलिंगी ही जानते नहीं तो खैर
भूले भटके भ्रम में पड़े मूर्ख लोग
आपका पथ जानेंगे भी कैसे
गोहेश्वरप्रिय निराळलिंग? / 2273 [1]

मात्र शिव-शिव बोलने से भव मिटेगा,
यों कहते अज्ञानियों की बात नहीं सुनी जाती
क्योंकि
अँधेरे कमरे में ज्योति के स्मरण मात्र से उजाला होगा क्या?
काम ज्वरवाले रंभा को याद करने से
कामज्वर का ताप मिटेगा क्या?
मूर्ख व्यक्तियों के ऐसे व्यवहार को देख
हँसते रहे हमारे गोहेश्वरप्रिय निराळलिंग। / 2274 [1]

निष्ठाहीन भृत्य से क्या निभेगा, बत्तीस आयुधधारी होने पर भी ?
वेश्या का सर्वभूषण क्या शोभेगा?
अंधे के हाथ के आईने से क्या प्रयोजन ?
धर्म न जानने वाले के धन से क्या प्रयोजन?
ज्ञानहीन के वेषधारण से क्या होगा?
प्राणलिंग से अनभिज्ञ मूर्ख लोगों के अंग पर
लिंग धारण करने से क्या होगा?
यों षविध भेद से अनभिज्ञ भवि
आपका पथ क्या जाने?
स्थावरलिंग की पूजा करनेवाले उन द्रोहियों को
मैं क्या कहूँ, गोहेश्वरप्रिय निराळलिंग। / 2275", [1]

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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