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जोदर मायण्णा (1160)

पूर्ण नाम: जोदर मायण्णा
वचनांकित : सोमनाथ लिंग'
कायक (काम): सेना के उच्च अधिकारी

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पूर्व में परदारा को पार्वती
कहलाया था गुरुवाणी ने।
तदनंतर शरण सती कह
समझाकर कहा था गुरुवाणी ने।
उसके बाद सभी सतियों को गुरुपत्नी कह
समझाकर सिखाया था गुरुवाणी ने।
आचरण में न चूके, झूठ न बोलो कह।
समझाकर सिखाया था गुरुवाणी ने।
बिना व्यथा के मोहित मन को
निश्चित कराया था गुरुवाणी ने।
शम्भु सोमनाथ लिंग का संग
सुसंग बनाया था गुरुवाणी ने। / 1779 [1]

कहा जाता है कि जोदर मायण्णा राजा बिज्जल के दरबार में हाथी की सेना के उच्च अधिकारी थे। 'सोमनाथ लिंग' वचनांकित से इनके पाँच वचन मिले हैं। इन वचनों में भृत्यभाव, पुरातन शरणों का स्मरण, कथनी-करनी में निष्ठा, गुरुवचन महत्व आदि विचार अभिव्यक्ति पाये हैं। माना जाता

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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