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काटकूटय्या की पत्नी रेचव्वे (1160)

पूर्ण नाम: काटकूटय्या की पत्नी रेचव्वे
वचनांकित : ‘निजशांतेश्वर
कायक (काम): गढ़रिया (shepherd)

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बाँझ गाय में कैसा दूध?
व्रतहीन के साथ कैसा संग ?
चाहे तो तुम उनका संग कर लो
मैं न चाहती, हे, निजशांतेश्वर । / 1305 [1]

रेचव्वे के पति काटकूटय्या हैं। शरण होने के पहले वीर गोल्लाळ को काटकूटय्या कहते थे। तब तो ये वीर गोल्लाळ की पत्नी हैं। गोल्लाळ बिजापुर जिला सिंदगी तालूक गोलगेरी के रहनेवाले थे। वृत्ति से यह गढ़रिया थे। अत: रेचव्वे भी मूलतः गोलगेरी से कल्याण आयी होगी। इनका ‘निजशांतेश्वर' अंकित से एक वचन प्राप्त है। उस वचन का आशय व्रताचारनिष्ठा है।

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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