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मडिवाळ माचिदेव

पूर्ण नाम: मडिवाळ माचिदेव
वचनांकित : कलिदेवरदेव
कायक (काम): शरणों के कपड़ों को धोकर शुभ्र करना (Washerman)

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वेद ब्राह्मणों का उपदेश है।
शास्त्र हाट की बात है।
पुराण उपद्रवियों की गोष्टी है,
आगम झूठे शब्द है,
तर्क, व्याकरण, कवित्व प्रौढ़ता
ऐसे लोगों के अंग पर लिंग विहीन भाषा है।
इसलिए
अपने को जाने अनुभावी से बड़े महात्मा
नहीं है, कहते हैं कलिदेव । / 1896 [1]

माचिदेव वीरनिष्ठा के शरण थे। उनका जन्मस्थान बिजापुर जिले का देवरहिप्परगी है। कल्याण उनका कार्यक्षेत्र बना। कल्लिनाथ उनका आराध्य दैव था। काव्य और पुराणों में उन्हें वीरभद्र का अवतार कहा गया है। शिलाशासन शिल्पों में भी इनका उल्लेख मिलता है। शरणों के कपड़ों को धोकर शुभ्र करना इनका कायक था।

माचिदेव के जीवन में कई घटनाएँ घटीं। उनमें राजा बिज्जल के अपने ऊपर टूट पड़े मत्त हाथी का मर्दन करना, बसवण्णा का अहं निरसन, नुलिय चंदय्या को इष्टलिंग की आवश्यकता समझाना, कल्याण क्रांति के बाद उळवे की ओर चले शरणों की टोली का नेतृत्व का बिज्जल की सेना से लड़ते शरणों और शरण साहित्य की रक्षा करना, प्रमुख हैं।

‘कलिदेवरदेव' वचनांकित में रचे माचिदेव के 354 वचन मिले हैं। उनमें गणाचार निष्ठा, डांभिकता, कर्मठता, क्षुद्र देवाराधना और स्थावर लिंग पूजा पर निष्ठुर आलोचना प्रमुख रुप में प्रतिपादित हैं।

शेर के सामने हरिण के उछलने कूदने से क्या होता है?
प्रलयाग्नि के सामने पतंग के खेल से होता क्या है?
सूर्य के सामने कीट के खेल से होता क्या है?
आपके सामने मेरा खेल चलेगा क्या, कलिदेवर देव ? / 1898 [1]

स्त्री के लिए मरने से जन्म-मरण,
धन के लिए मरने से जन्म-मरण,
मिट्टी के लिए मरने से जन्म-मरण,
परधन, परसती के लिए मरने से जन्म-मरण
शिव भक्त होकर, एक लिंग निष्ठा संपन्न होकर
शिवाचार के लिए मरने से मुक्ति,
कहा कलिदेवय्या ने। / 1900 [1]

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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