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नि:कळंक चेन्नसोमेश्वर (लगभग 1650ईमें)

पूर्ण नाम: नि:कळंक चेन्नसोमेश्वर

शून्य प्रदेश सारा घनीभूत हो जाय तो,
स्वर्ग मर्त्य पाताल के लिए स्थान कहाँ?
परिश्रम न करनेवाले मानव सभी,
संसार त्यागने का नाम लेकर केशमुंडन करने से वह
सुज्ञानी विरक्त बन पायेगा क्या? इस कारण,
अज्ञान को भूलकर, सुज्ञान दिखाएगा तो
नि:कळंक चेन्नसोमेश्वर, स्वयं ही है। (2230) [1]

इस वचनांकित में प्राप्त एक वचन सुज्ञान शरण की स्थिति का परिचय देता है।

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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