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ओक्कलिग मुद्दण्णा (1160)

पूर्ण नाम: ओक्कलिग मुद्दण्णा
वचनांकित : कामभीम जीवधनदोडेय
कायक (काम): कृषि (Farmer)

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अंग रूपी भूमि में लिंग फसल और
विश्वास रूपी धान पैदाकर
उसे खाकर तृप्त होना चाहिए कहा
कामभीम जीवनदोडेय ने। / 1612 [1]

जोळदहाळ गाँव के रहनेवाले मुद्दण्णा वृत्ति से कृषक थे। इसका नित्यव्रत था जंगम दासोह करना । राजा को अधिक कर न देकर उसे दासोह में खर्च करता है। 'कामभीम जीवधनदोडेय' अंकित से रचे 12 वचन प्राप्त हुए हैं। कृषक वृत्ति की परिभाषा और मुग्ध भक्ति, सरल-प्रासादिक शैली में अभिव्यक्ति पायी है।

वेद शास्त्र पढ़ने, ब्राह्मण नहीं हूँ
लड़कर वीरता दिखाने, क्षत्रिय नहीं हूँ।
व्यवहार करने, वैश्य नहीं हूँ।
मैं तो जोतनेवाला खेतिहर हूँ, मेरी गलती की
परवाह किये बिना अपनाओ, मुझे
कामभीम जीवनदोडेय। / 1613 [1]

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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