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पुरद नागण्णा (1160)

पूर्ण नाम: पुरद नागण्णा
वचनांकित : अमरगुंडद मल्लिकार्जुन

ध्यान करते मन को तुमने मिट्टि दिखाई ।
देखति आँख को तुमने स्त्रि को दिखाया।
पूजा करते हाथ को सोना ही दीखाया।
इस प्रकार इन त्रिविधों को दिखाकर
भुलावे में तुमने रखा। /१८२५ [1]

पुरदनागण्णा अमरगुंड के मल्लिकार्जुन के पुत्र थे। अमरगुंड अर्थात् तुमकूर जिले का गुबि है। इनके "अमरगुंडद मल्लिकार्जुन" वचनांकित 9 वचन उपलब्ध हैं। बसवादि शरणों की स्तुति, निजानंद भक्ति की चाह, गुरुपादोदक की महिमा, शरण का स्वरूप, लिंग निष्ठा आदि विषयों का विवरण उन वचनों में है। कुछ वचन उलटबासियों में हैं।

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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