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रायसद मंचण्णा (1160)

पूर्ण नाम: रायसद मंचण्णा
वचनांकित : जांबेश्वर
कायक (काम): पत्र व्यवहार देखनेवाले

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तलवार को घात करने के पहले ही रोकोगे तो
तलवार क्या करेगी?
साँप के मुँह खोलने से पहले ही, उसे बंद करो तो।
ज़हर क्या कर सकता है?
मन विकारों के वश होने से पहले ही, वस्तु में एक हो तो,
फिर इन्द्रिय क्या कर सकते हैं? हे जांबेश्वर! / 2022 [1]

मंचण्णा कल्याण में बसवण्णा के पत्र व्यवहार देखनेवाले एक नियोगी थे। रायम्मा इनकी पत्नी थीं। ‘जांबेश्वर' वचनांकित में इनके 10 वचन रचे मिले हैं। वे बहुत सरल हैं। उनमें इष्टलिंग का महत्व, मन के विकार, इंद्रिय निग्रह, ज्ञान, आचार के बारे में निरूपण हैं। वचनों में प्रयुक्त उपमा और दृष्टांत अर्थपूर्ण हैं।

लिखकर फिर मिटाने पर, उस लेख को शुद्ध न कहूँगा।
जानकर फिर भूलो तो उसे ज्ञान का भंग कहूँगा।
मृत्यु के बाद, सागर भी ठीक है,
चुल्लूभर पानी भी ठीक है, जांबेश्वर / 2023[1]

हंस के, दूध और पानी मिला देने पर।
पानी छोड़कर, दूध लेने का, रहस्य देखो!
तेल और पानी मिले तो वह अपने आप बढ़कर
खूब जलने का रहस्य देखो!
मिट्टी में सोना जो है, वह अलग होकर,
सोना अनमोल बनने का रहस्य देखो!
अपने में आप रहकर भी, अपने को न जानकर,
परेशान होने का अनुभव देखो,
अच्छे परिश्रमी भाई सब, सोना,
स्त्री और मिट्टी के मोह में फँसकर,
निधियुक्त पुरुषों के द्वार पर खड़े होकर,
विवर्ण हुओं को देखकर, हँस रहा है जांबेश्वर! / 2024 [1]

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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