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सत्यक्का (1160)

पूर्ण नाम: सत्यक्का
वचनांकित : शंभुजक्केश्वर
कायक (काम): भक्तों के आंगन में झाडू लगाना

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सत्यक्का के वचन

अर्चना, पूजा व्रत नहीं।
मंत्रतंत्र व्रत नहीं।
धूप दीपारती व्रत नहीं।
परधन, परस्त्री, परदैव के शरण में न जाना ही व्रत है।
शंभुजक्केश्वर में ये नित्य व्रत हैं देखिए। / 1342 [1]

सत्यक्का शिमोगा जिला शिराळकोप्पा के पास हिरे जंबूर की थीं। इनका कायक था भक्तों के आंगन में झाडू लगाना। ‘शंभुजक्केश्वर' वचनांकित में रचे 27 वचन मिले हैं। उन वचनों में शिवपारम्य, सद्भक्तों की महिमा, सतीपति भाव, सदाचार में चलनेवाले गुरु शिष्य-जंगमों के गुण लक्षण, डांभिक भक्तों की आलोचना, स्त्री पुरुष समानता का संदेश आदि अभिव्यक्त हैं।

रास्ते में सोना वस्त्रादि पड़े हो और
यदि मैं हाथ से उठाऊँ तो
आपकी कसम, आपके प्रमथ गणों की कसम ।।
क्योंकि आप जो भिक्षा देंगे उसी में मैं रहूँगी।
ऐसा न करके लोभ से
यदि परधन के लिए इच्छा करूँ तो
मुझे नरक में डुबोकर
आप चले जाइए हे शंभुजक्केश्वर। / 1346 [1]

भवि के साथ भक्ति, हविस के बीज
उदक मिश्रित तैल से ज्योति जलती है क्या?
भवि नहीं, भक्ति नहीं, हविस नहीं, बीज नहीं, उदक नहीं, तैल नहीं।
तन की इच्छा से भवि के घर में खानेवाले
पापियों को क्यों चाहेगा हमारा शंभुजक्केश्वर। / 1347 [1]

कच, कुच हो तो स्त्री ऐसा प्रमाणित नहीं
काचनी, मूंछ कटार हो तो पुरुष, ऐसा प्रमाणित नहीं
वह जग की दृष्टि, ज्ञानियों की नीति नहीं।
कोई भी फल हो मधुरता ही उसका लक्ष्य है।
फूल कोई भी हो सुगंध ही लक्ष्य है।
इसका रहस्य तुम्हीं जानते हो, शंभुजक्केश्वर । / 1348 [1]

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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