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शिवनागमय्या (1160)

पूर्ण नाम: शिवनागमय्या
वचनांकित : नागप्रिय चेन्नरामेश्वर

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अंग पर लिंग धारण करने के बाद लिंग विहीनों से मेलजोल नहीं करना;
अंग पर लिंग धारण के बाद,
लिंगभाव से सभी कार्यों पर ध्यान देना होगा,
अंगभाव से नहीं।
लिंग संबंधी होने के बाद, अंग भाव में रहनेवाले
लिंग देव से दूर हैं।
हे नागप्रिय चेन्नरामेश्वर! / 2031 [1]

शिवनागमय्या अस्पृश्य मूल के शरण थे। इनके ‘नागप्रिय चेन्नरामेश्वर’ वचनांकित में रचे 3 वचन मिले हैं। उन वचनों में लिंग का महत्व, सदाचार निष्ठा आदि पर श्रद्धापूर्वक वताया गया है।

References

[1] Vachana number in the book "VACHANA" (Edited in Kannada Dr. M. M. Kalaburgi), Hindi Version Translation by: Dr. T. G. Prabhashankar 'Premi' ISBN: 978-93-81457-03-0, 2012, Pub: Basava Samithi, Basava Bhavana Benguluru 560001.

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